वर्तमान समय में इस्पात इंजीनियरिंग और निर्माण के प्रमुख सामग्रियों में से एक है। इसका उपयोग अत्यंत व्यापक है—ऑटोमोबाइल निर्माण, अनेक घरेलू उपकरणों, जहाज़ों, शल्य-चिकित्सा उपकरणों और निर्माण उत्पादों के उत्पादन में इसके बिना कार्य संभव नहीं है। इस्पात के मुख्य घटक लोहा और कार्बन के मिश्रधातु होते हैं, किंतु इसमें अन्य कई तत्व भी सम्मिलित होते हैं, हालांकि बहुत कम मात्रा में। यह जानना महत्वपूर्ण है कि वर्तमान में इस्पात के कई हज़ार ग्रेड प्रचलित हैं। विभिन्न प्रकार भौतिक और रासायनिक गुणों में एक-दूसरे से भिन्न होते हैं।
इस्पात ताप-उपचारित लोहे की मिश्रधातु है, जिसे विभिन्न तत्वों—मुख्य रूप से कार्बन—के साथ संयोजित किया जाता है। जिन गुणों को प्राप्त करना होता है, उनके अनुसार अन्य तत्व अलग-अलग अनुपातों में जोड़े जाते हैं। इस्पात के उत्पादन के दौरान अनेक अशुद्धियाँ उत्पन्न होती हैं, जिन्हें हटाना आवश्यक होता है। इसके लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है। इस्पात को परिष्करण प्रक्रिया द्वारा या विशेष भट्टियों—मुख्यतः कन्वर्टर और वैक्यूम भट्टियों—में तैयार किया जाता है। इस्पात के अनेक ग्रेड होते हैं, जो उपयोग, गुणवत्ता, यांत्रिक एवं भौतिक गुणों तथा रासायनिक संरचना में भिन्न होते हैं। इनके वर्गीकरण हेतु अक्षरीय और संख्यात्मक चिह्नों का प्रयोग किया जाता है। इस्पात की प्रमुख विशेषताओं में उच्च तन्यता और संपीडन शक्ति शामिल है। यह उच्च लोचशीलता और प्लास्टिसिटी वाला पदार्थ है, जिससे इसका प्रसंस्करण सरल होता है। इसमें नमनशीलता, कठोरता तथा आघात-प्रतिरोध भी पाया जाता है। प्रतिकूल मौसमीय परिस्थितियों के प्रति कम संवेदनशीलता के कारण इसका उपयोग अत्यंत व्यापक है।
इस्पात को संपीडन, मोड़ और मरोड़ के प्रति उच्च प्रतिरोध के कारण अत्यधिक महत्व दिया जाता है। यह अपनी मूल अवस्था में लौट सकता है और इसे प्रेसिंग तथा सीधाकरण प्रक्रियाओं से गुजारा जा सकता है। इस्पात अत्यधिक और निम्न तापमानों के प्रति भी प्रतिरोधी होता है—यह न तो ठंड से नष्ट होता है और न ही अत्यधिक गर्मी से। यह जंग के प्रति भी प्रतिरोधी है। उत्कृष्ट वेल्डेबिलिटी के कारण इस्पात के तत्वों को आपस में जोड़ा जा सकता है, जिससे अत्यंत मजबूत जोड़ बनते हैं। इसकी संरचना समरूप होती है, जो इसका एक अतिरिक्त लाभ है। आधुनिक इस्पात ग्रेड और भी बेहतर गुण प्रदान करते हैं—जैसे अधिक मजबूती, बेहतर वेल्डेबिलिटी और जंग के प्रति उच्च प्रतिरोध। इस्पात के गुणों पर मुख्य रूप से कार्बन की मात्रा, प्रयुक्त मिश्रधातु तत्व और अपनाई गई ताप-उपचार प्रक्रिया का प्रभाव पड़ता है। रासायनिक संरचना और उपयोग के आधार पर इस्पात के कई प्रकार होते हैं: कार्बन इस्पात (निम्न, मध्यम, उच्च कार्बन), मिश्रधातु इस्पात (निम्न, मध्यम, उच्च मिश्रधातु), संरचनात्मक इस्पात (सामान्य उपयोग, निम्न मिश्रधातु, उच्च गुणवत्ता, ऑटोमैट, बेयरिंग, स्प्रिंग, नाइट्राइडिंग हेतु, बॉयलर, घिसाव-प्रतिरोधी), औज़ार इस्पात (कार्बन, मिश्रधातु, हाई-स्पीड, विशेष, स्टेनलेस, सर्जिकल, अम्ल-प्रतिरोधी, चुंबकीय, घिसाव-प्रतिरोधी, ट्रांसफॉर्मर, वाल्व, ऊष्मा-प्रतिरोधी)।
इस्पात और लोहा कई पहलुओं में एक-दूसरे से भिन्न होते हैं, यद्यपि दिखने में कभी-कभी इन्हें भ्रमित किया जा सकता है। लोहा एक तत्व है, जो इस्पात के उत्पादन के लिए आवश्यक होता है, ठीक उसी प्रकार जैसे कार्बन। वहीं इस्पात एक मिश्रधातु है। लोहे में भी कार्बन होता है, किंतु इस्पात की तुलना में बहुत कम मात्रा में। सदियों से लोहे का उपयोग विभिन्न मशीनों और औज़ारों के निर्माण में किया जाता रहा है। अन्य तत्वों के साथ संयोजन करने पर विभिन्न उपयोगों के लिए अलग-अलग इस्पात मिश्रधातुएँ प्राप्त होती हैं। लोहा पृथ्वी की पपड़ी में पाया जाता है और हीमोग्लोबिन का भी आवश्यक घटक है। इसके विपरीत, इस्पात मानव द्वारा निर्मित पदार्थ है, जो विभिन्न घटकों को मिलाकर और ताप-उपचार द्वारा तैयार किया जाता है। यह प्राकृतिक रूप से नहीं पाया जाता।
इस्पात का निर्माण एक बहु-चरणीय प्रक्रिया है। सदियों के दौरान इसकी उत्पादन विधियाँ काफ़ी विकसित हुई हैं। तकनीकी प्रगति के कारण आज उपयोग की जाने वाली विधियाँ पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी हैं। फिर भी कच्चे माल को अंतिम उत्पाद—जैसे स्टेनलेस इस्पात—में बदलने में पर्याप्त समय लगता है। सबसे पहले लोहा तैयार किया जाता है, साथ ही चूना और कोक की भी आवश्यकता होती है। सभी घटकों को भट्टी में पिघलाया जाता है, जिससे अत्यंत गर्म धातु प्राप्त होती है, जिसमें कई अशुद्धियाँ होती हैं। यदि इन्हें हटाया न जाए, तो सामग्री की मजबूती कम हो जाती है और वह भंगुर हो सकती है। इस समस्या के समाधान हेतु पिघली धातु में इस्पात स्क्रैप मिलाया जाता है और ऑक्सीजन प्रविष्ट की जाती है। इससे कार्बन और अन्य अवांछित अशुद्धियाँ हट जाती हैं। आजकल कई निर्माता विद्युत भट्टियों का उपयोग करते हैं, जहाँ विद्युत ऊर्जा के माध्यम से कच्चा इस्पात प्राप्त किया जाता है।
इसके बाद द्वितीयक इस्पात का निर्माण किया जाता है। सबसे पहले उत्पाद की रासायनिक संरचना की जाँच की जाती है। वांछित उपयोग के अनुसार गुणवत्ता प्राप्त करने हेतु कार्बन की मात्रा को नियंत्रित किया जाता है और एल्युमिनियम जैसे तत्व जोड़े जाते हैं। विभिन्न तकनीकों—जैसे तापमान परिवर्तन, गैसों का निष्कासन या लेडल उपचार—का चयन अंतिम इस्पात ग्रेड के अनुसार किया जाता है। इसके बाद गर्म धातु को साँचों में डाला जाता है, जहाँ वह ठंडी होती है।
तापमान में कमी से इस्पात कठोर होता है, किंतु पूर्ण रूप से ठंडा होने से पहले ही इसे निकाला जाता है। अगला चरण कटाई का होता है। वांछित लंबाई प्राप्त होने के बाद इसे पूरी तरह ठंडा किया जाता है। इसके पश्चात प्रारंभिक प्रसंस्करण किया जाता है, जैसे गरम रोलिंग द्वारा विभिन्न आकार देना। फिर द्वितीयक प्रसंस्करण किया जाता है, जिसमें कोटिंग, जोड़ना, प्रेसिंग, ड्रिलिंग, रिवेटिंग आदि शामिल हैं।
इस्पात के उपयोग पर इसके यांत्रिक और तकनीकी गुणों का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। उपयोग के अनुसार उपयुक्त ग्रेड चुना जाता है। इस्पात का उपयोग अनेक तकनीकी क्षेत्रों और उद्योगों में किया जाता है। यह निर्माण संरचनाओं, छतों और मुखौटों, वाहन बॉडी, खाद्य डिब्बों, जहाज़ों, समुद्री प्लेटफार्मों और मशीन भागों के निर्माण में आवश्यक है। प्रमुख इस्पात उत्पादों में शीट, रॉड, बोल्ट, कीलें, प्रोफ़ाइल, स्ट्रिप्स और केबल शामिल हैं। विद्युत प्रतिष्ठानों, पुलों, हॉलों और सार्वजनिक उपयोग की इमारतों के निर्माण में भी इस्पात अनिवार्य है। इसके बिना अनेक बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का क्रियान्वयन संभव नहीं होता।
इस्पात क्या है और इसके कौन-कौन से प्रकार होते हैं?
इस्पात ताप-उपचारित लोहे की मिश्रधातु है, जिसे विभिन्न तत्वों—मुख्य रूप से कार्बन—के साथ संयोजित किया जाता है। जिन गुणों को प्राप्त करना होता है, उनके अनुसार अन्य तत्व अलग-अलग अनुपातों में जोड़े जाते हैं। इस्पात के उत्पादन के दौरान अनेक अशुद्धियाँ उत्पन्न होती हैं, जिन्हें हटाना आवश्यक होता है। इसके लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है। इस्पात को परिष्करण प्रक्रिया द्वारा या विशेष भट्टियों—मुख्यतः कन्वर्टर और वैक्यूम भट्टियों—में तैयार किया जाता है। इस्पात के अनेक ग्रेड होते हैं, जो उपयोग, गुणवत्ता, यांत्रिक एवं भौतिक गुणों तथा रासायनिक संरचना में भिन्न होते हैं। इनके वर्गीकरण हेतु अक्षरीय और संख्यात्मक चिह्नों का प्रयोग किया जाता है। इस्पात की प्रमुख विशेषताओं में उच्च तन्यता और संपीडन शक्ति शामिल है। यह उच्च लोचशीलता और प्लास्टिसिटी वाला पदार्थ है, जिससे इसका प्रसंस्करण सरल होता है। इसमें नमनशीलता, कठोरता तथा आघात-प्रतिरोध भी पाया जाता है। प्रतिकूल मौसमीय परिस्थितियों के प्रति कम संवेदनशीलता के कारण इसका उपयोग अत्यंत व्यापक है।
इस्पात को संपीडन, मोड़ और मरोड़ के प्रति उच्च प्रतिरोध के कारण अत्यधिक महत्व दिया जाता है। यह अपनी मूल अवस्था में लौट सकता है और इसे प्रेसिंग तथा सीधाकरण प्रक्रियाओं से गुजारा जा सकता है। इस्पात अत्यधिक और निम्न तापमानों के प्रति भी प्रतिरोधी होता है—यह न तो ठंड से नष्ट होता है और न ही अत्यधिक गर्मी से। यह जंग के प्रति भी प्रतिरोधी है। उत्कृष्ट वेल्डेबिलिटी के कारण इस्पात के तत्वों को आपस में जोड़ा जा सकता है, जिससे अत्यंत मजबूत जोड़ बनते हैं। इसकी संरचना समरूप होती है, जो इसका एक अतिरिक्त लाभ है। आधुनिक इस्पात ग्रेड और भी बेहतर गुण प्रदान करते हैं—जैसे अधिक मजबूती, बेहतर वेल्डेबिलिटी और जंग के प्रति उच्च प्रतिरोध। इस्पात के गुणों पर मुख्य रूप से कार्बन की मात्रा, प्रयुक्त मिश्रधातु तत्व और अपनाई गई ताप-उपचार प्रक्रिया का प्रभाव पड़ता है। रासायनिक संरचना और उपयोग के आधार पर इस्पात के कई प्रकार होते हैं: कार्बन इस्पात (निम्न, मध्यम, उच्च कार्बन), मिश्रधातु इस्पात (निम्न, मध्यम, उच्च मिश्रधातु), संरचनात्मक इस्पात (सामान्य उपयोग, निम्न मिश्रधातु, उच्च गुणवत्ता, ऑटोमैट, बेयरिंग, स्प्रिंग, नाइट्राइडिंग हेतु, बॉयलर, घिसाव-प्रतिरोधी), औज़ार इस्पात (कार्बन, मिश्रधातु, हाई-स्पीड, विशेष, स्टेनलेस, सर्जिकल, अम्ल-प्रतिरोधी, चुंबकीय, घिसाव-प्रतिरोधी, ट्रांसफॉर्मर, वाल्व, ऊष्मा-प्रतिरोधी)।
इस्पात और लोहा में क्या अंतर है?
इस्पात और लोहा कई पहलुओं में एक-दूसरे से भिन्न होते हैं, यद्यपि दिखने में कभी-कभी इन्हें भ्रमित किया जा सकता है। लोहा एक तत्व है, जो इस्पात के उत्पादन के लिए आवश्यक होता है, ठीक उसी प्रकार जैसे कार्बन। वहीं इस्पात एक मिश्रधातु है। लोहे में भी कार्बन होता है, किंतु इस्पात की तुलना में बहुत कम मात्रा में। सदियों से लोहे का उपयोग विभिन्न मशीनों और औज़ारों के निर्माण में किया जाता रहा है। अन्य तत्वों के साथ संयोजन करने पर विभिन्न उपयोगों के लिए अलग-अलग इस्पात मिश्रधातुएँ प्राप्त होती हैं। लोहा पृथ्वी की पपड़ी में पाया जाता है और हीमोग्लोबिन का भी आवश्यक घटक है। इसके विपरीत, इस्पात मानव द्वारा निर्मित पदार्थ है, जो विभिन्न घटकों को मिलाकर और ताप-उपचार द्वारा तैयार किया जाता है। यह प्राकृतिक रूप से नहीं पाया जाता।
इस्पात कैसे बनता है?
इस्पात का निर्माण एक बहु-चरणीय प्रक्रिया है। सदियों के दौरान इसकी उत्पादन विधियाँ काफ़ी विकसित हुई हैं। तकनीकी प्रगति के कारण आज उपयोग की जाने वाली विधियाँ पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी हैं। फिर भी कच्चे माल को अंतिम उत्पाद—जैसे स्टेनलेस इस्पात—में बदलने में पर्याप्त समय लगता है। सबसे पहले लोहा तैयार किया जाता है, साथ ही चूना और कोक की भी आवश्यकता होती है। सभी घटकों को भट्टी में पिघलाया जाता है, जिससे अत्यंत गर्म धातु प्राप्त होती है, जिसमें कई अशुद्धियाँ होती हैं। यदि इन्हें हटाया न जाए, तो सामग्री की मजबूती कम हो जाती है और वह भंगुर हो सकती है। इस समस्या के समाधान हेतु पिघली धातु में इस्पात स्क्रैप मिलाया जाता है और ऑक्सीजन प्रविष्ट की जाती है। इससे कार्बन और अन्य अवांछित अशुद्धियाँ हट जाती हैं। आजकल कई निर्माता विद्युत भट्टियों का उपयोग करते हैं, जहाँ विद्युत ऊर्जा के माध्यम से कच्चा इस्पात प्राप्त किया जाता है।
इसके बाद द्वितीयक इस्पात का निर्माण किया जाता है। सबसे पहले उत्पाद की रासायनिक संरचना की जाँच की जाती है। वांछित उपयोग के अनुसार गुणवत्ता प्राप्त करने हेतु कार्बन की मात्रा को नियंत्रित किया जाता है और एल्युमिनियम जैसे तत्व जोड़े जाते हैं। विभिन्न तकनीकों—जैसे तापमान परिवर्तन, गैसों का निष्कासन या लेडल उपचार—का चयन अंतिम इस्पात ग्रेड के अनुसार किया जाता है। इसके बाद गर्म धातु को साँचों में डाला जाता है, जहाँ वह ठंडी होती है।
तापमान में कमी से इस्पात कठोर होता है, किंतु पूर्ण रूप से ठंडा होने से पहले ही इसे निकाला जाता है। अगला चरण कटाई का होता है। वांछित लंबाई प्राप्त होने के बाद इसे पूरी तरह ठंडा किया जाता है। इसके पश्चात प्रारंभिक प्रसंस्करण किया जाता है, जैसे गरम रोलिंग द्वारा विभिन्न आकार देना। फिर द्वितीयक प्रसंस्करण किया जाता है, जिसमें कोटिंग, जोड़ना, प्रेसिंग, ड्रिलिंग, रिवेटिंग आदि शामिल हैं।
इस्पात से क्या बनाया जा सकता है? इसका उपयोग कहाँ होता है?
इस्पात के उपयोग पर इसके यांत्रिक और तकनीकी गुणों का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। उपयोग के अनुसार उपयुक्त ग्रेड चुना जाता है। इस्पात का उपयोग अनेक तकनीकी क्षेत्रों और उद्योगों में किया जाता है। यह निर्माण संरचनाओं, छतों और मुखौटों, वाहन बॉडी, खाद्य डिब्बों, जहाज़ों, समुद्री प्लेटफार्मों और मशीन भागों के निर्माण में आवश्यक है। प्रमुख इस्पात उत्पादों में शीट, रॉड, बोल्ट, कीलें, प्रोफ़ाइल, स्ट्रिप्स और केबल शामिल हैं। विद्युत प्रतिष्ठानों, पुलों, हॉलों और सार्वजनिक उपयोग की इमारतों के निर्माण में भी इस्पात अनिवार्य है। इसके बिना अनेक बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का क्रियान्वयन संभव नहीं होता।

